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किन दस्तावेजों का पंजीयन अनिवार्य है

कतिपय निम्न दस्तावेजों की रजिस्ट्री अनिवार्य है -

1. स्थावर संपत्ति के दान की लिखत,
2. एक सौ रूपए से या उससे अधिक मूल्य की स्थावर संपत्ति पर अधिकार, हित या हक
का अंतरण,
3. उक्त के विरूद्ध प्रतिफल की प्राप्ति या संदाय की अभिस्वीकृति,
4. वर्षानुवर्ष या एक वर्ष से अधिक की किसी अवधि के लिए या वार्षिक भाटक को आरक्षित करने वाली स्थावर संपत्ति के पट्टे,
5. न्यायालय की डिक्री, आदेश या पंचाट का ऐसा अंतरण जो किसी स्थावर संपत्ति में 100 रूपये से अधिक के हित का हस्तांतरण करता हो,

रजिस्ट्री न होने की दशा में परिणाम

जिन दस्तावेजों की रजिस्ट्री अनिवार्य है, उनकी रजिस्ट्री न होने की दशा में निम्न परिणाम होते हैं -

1. ऐसी लिखत उसमें समाविष्ट किसी भी स्थावर संपत्ति पर प्रभाव नहीं डालेगी,

अथवा

2 दत्तक ग्रहण की को भी शक्ति प्रदत्त नहीं करेगी,

अथवा

3. ऐसी संपत्ति पर प्रभाव डालने वाले या ऐसी शक्ति को प्रदत्त करने वाले किसी भी संव्यवहार के साक्ष्य के रूप में नहीं ली जाएगी ।

सम्यक रूपसे स्टाम्पित न की र्ग लिखतें साक्ष्य आदि में अग्राहय हैं

भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 35 में प्रावधान किया गया है कि शुल्क से प्रभार्य को लेकिन सम्यक रूप से स्टाम्पित नहीं की किसी लिखत -

(क) को साक्ष्य अभिलिखित करने के लिए विधि द्वारा या पक्षकारों की सम्मति से प्राधिकार रखने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी भी प्रयोजन के लिए साक्ष्य में ग्रहण नहीं किया जाएगा,
(ख) पर कार्यवाही,
(MÉ) को रजिस्ट्रीकृत,
(PÉ) को अधिप्रमाणिकृत,

पूर्वोक्त किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा या लोक अधिकारी द्वारा नहीं किया जाएगा ।

लिखतों की परीक्षा और परिबद्ध करने का लोक अधिकारियों का दायित्व

भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 33 उपबंधित करती है कि हर व्यक्ति, जो विधि द्वारा या पक्षकारों की सम्मति से साक्ष्य लेने का प्राधिकार रखता है और पुलिस अधिकारी के अलावा लोक कार्यालय का भार साधक हर व्यक्ति जिसके समक्ष उसकी राय में शुल्क से प्रभार्य को लिखत उसके कृत्यों के पालन में पेश की जाती है या आ जाती है, उस दशा में उसे परिबद्ध (Impound) करेगा, जिसमें कि यह प्रतीत होता है कि ऐसी लिखत सम्यक रूप से स्टाम्पित नहीं है ।

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